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Saturday, 9 April 2016

uttarakhand chardham tour packages, uttarakhand chardham yatra

At UTTARAKHAND CHARDHAM TOUR PACKAGES, we have tried to give all information and services about the chardham (Yamunotri, Gangotri, Sri Kedarnath, Sri Badrinath) who helps the tourist, want to visit chardham Yatra. The company is running and handled by a good qualified team members having many years of experience in tourism.
VISIT:
www.uttarakhandchardham.com

Sunday, 13 March 2016

उत्तराखंड चारधाम – चारधाम उत्तराखंड – उत्तराखंड चारधाम यात्रा – देवभूमि उत्तराखंड

चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड राज्य में स्थित बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ की यात्रा को कहते है। यह एक  धार्मिक यात्रा है. पर्त्येक साल लाखो  की संख्या मै शर्दालू दर्शन करने आते है. बद्रीनाथ धाम चमोली जिले मै, केदारनाथ धाम रुद्रप्रयाग जिले मै, और गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम उत्तरकाशी जिले मै इश्तिथ है.
बद्रीनाथ धाम हिमालय में स्थित पवित्र स्थानों में से एक है। यह उत्तराखंड के बद्रीनाथ में समुद्र तल से 3133 मीटर की उंचाई पर स्थित है। बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि उन्होंने इस पवित्र स्थान में तपस्या की थी। भगवान बद्री नारायण ने एक हाथ में शंख और दूसरे हाथ में चक्र पकड़ रखा है। दोनों हाथ उनकी गोद में योगमुद्रा में हैं। इस तीर्थस्थल का दौरा करने का सबसे अच्छा समय मानसून छोड़कर मई से अक्टूबर तक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को खुले में तपस्या करते देखा तो उन्हें विपरीत मौसम से बचाने के लिए बद्री वृृक्ष का रुप धर लिया। इसलिए मंदिर का नाम बद्री नारायण पड़ा। मंदिर के वर्तमान स्वरुप का निर्माण गढ़वाल के राजाओं ने कराया था।
उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मन्दिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम[क] और पंच केदार[ख] में से भी एक है। यहाँ की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मन्दिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्‍य ही दर्शन के लिए खुलता है। पत्‍थरों से बने कत्यूरी शैली से बने इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पाण्डव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहाँ स्थित स्वयम्भू शिवलिंग अति प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने इस मन्दिर का जीर्णोद्धार करवाया।
गंगोत्री गंगा नदी का उद्गम स्थान है। गंगाजी का मंदिर, समुद्र तल से 3042 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। भागीरथी के दाहिने ओर का परिवेश अत्यंत आकर्षक एवं मनोहारी है। यह स्थान उत्तरकाशी से 100 किमी की दूरी पर स्थित है। गंगा मैया के मंदिर का निर्माण गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा द्वारा 18 वी शताब्दी के शुरूआत में किया गया था वर्तमान मंदिर का पुननिर्माण जयपुर के राजघराने द्वारा किया गया था।
चार धामों में से एक धाम यमुनोत्री से यमुना का उद्गम मात्र एक किमी की दूरी पर है। यहां बंदरपूंछ चोटी (6315 मी) के पश्चिमी अंत में फैले यमुनोत्री ग्लेशियर को देखना अत्यंत रोमांचक है। गढ़वाल हिमालय की पश्चिम दिशा में उत्तरकाशी जिले में स्थित यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। यमुना पावन नदी का स्रोत कालिंदी पर्वत है। तीर्थ स्थल से एक कि. मी. दूर यह स्थल 4421 मी. ऊँचाई पर स्थित है। दुर्गम चढ़ाई होने के कारण श्रद्धालू इस उद्गम स्थल को देखने से वंचित रह जाते हैं। यमुनोत्री का मुख्य मंदिर यमुना देवी को समर्पित है। पानी के मुख्य स्रोतों में से एक सूर्यकुण्ड है जो गरम पानी का स्रोत है।
·         बद्रीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को हिंदू धर्म में सर्वाधिक पवित्र तीर्थ स्थल कहा गया है।
·         इन सभी तीर्थस्थलों के हिमालय पर्वत श्रेणी की गोद में होने से इनका महत्व धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता हैं।
·         चार धाम के दर्शन एक ही यात्रा में करने पर धार्मिक आधार पर पहले यमुनोत्री फिर गंगोत्री उसके बाद केदारनाथ और आखिर में बद्रीनाथ जाया जाता है।
·         कहते है कि यहां यात्रा न सिर्फ पाप मुक्त करती है बल्कि जन्म और मृत्यु के चक्र से परे ले जाती है।
·         गढ़वाल हिमालय की पश्चिम दिशा में उत्तरकाशी ज़िले में स्थित यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है।

Wednesday, 24 February 2016

टिहरी गडवाल ,उत्तराखंड चारधाम , उत्तराखंड चारधाम यात्रा


प्रणाम 
आज ले चलता हूँ आप को में टिहरी गढ़वाल 
टिहरी और गढ़वाल दो अलग नामों को मिलाकर इस जिले का नाम रखा गया है। जहाँ टिहरी बना है शब्‍द ‘त्रिहरी’ से, जिसका अर्थ है एक ऐसा स्‍थान जो तीन प्रकार के पाप (जो जन्‍मते है मनसा, वचना, कर्मा से) धो देता है वहीं दूसरा शब्‍द बना है ‘गढ़’ से, जिसका मतलब होता है किला।
सन्‌ ८८८ से पूर्व सारा गढ़वाल क्षेत्र छोटे छोटे ‘गढ़ों’ में विभाजित था, जिनमें अलग-अलग राजा राज्‍य करते थे जिन्‍हें ‘राणा’, ‘राय’ या ‘ठाकुर’ के नाम से जाना जाता था। ऐसा कहाजाता है कि मालवा के राजकुमार कनकपाल एक बार बद्रीनाथ जी (जो वर्तमान चमोली जिले में है) के दर्शन को गये जहाँ वो पराक्रमी राजा भानु प्रताप से मिले। राजा भानु प्रताप उनसे काफी प्रभावित हुए और अपनी इकलौती बेटी का विवाह कनकपाल से करवा दिया साथ ही अपना राज्‍य भी उन्‍हें दे दिया। धीरे-धीरे कनकपाल और उनकी आने वाली पीढ़ियाँ एक-एक कर सारे गढ़ जीत कर अपना राज्‍य बड़ाती गयीं। इस प्रकार सन्‌ १८०३ तक सारा (९१८ वर्षों में) गढ़वाल क्षेत्र इनके अधिकार में आ गया। उन्‍ही वर्षों में गोरखाओं के असफल हमले (लंगूर गढ़ी को अधिकार में लेने का प्रयास) भी होते रहे, लेकिन सन्‌ १८०३ में आखिर देहरादून की एक लड़ाई में गोरखाओं की विजय हुई जिसमें राजा प्रद्वमुन शाह मारे गये। लेकिन उनके शाहजादे (सुदर्शन शाह) जो उस समय छोटे थे वफादारों के हाथों बचा लिये गये।
धीरे-धीरे गोरखाओं का प्रभुत्‍व बढ़ता गया और इन्‍होनें लगभग १२ वर्षों तक राज किया। इनका राज्‍य कांगड़ा तक फैला हुआ था, फिर गोरखाओं को महाराजा रणजीत सिंह ने कांगड़ा से निकाल बाहर किया। और इधर सुदर्शन शाह ने इस्‍ट इंडिया कम्‍पनी की मदद से गोरखाओं से अपना राज्‍य पुनः छीन लिया।
ईस्‍ट इण्डिया कंपनी ने फिर कुमाऊँ, देहरादून और पूर्व गढ़वाल को ब्रिटिश साम्राज्य में मिला दिया और पश्‍चिम गढ़वाल राजा सुदर्शन शाह को दे दिया जिसे तब टेहरी रियासत के नाम से जाना गया। राजा सुदर्शन शाह ने अपनी राजधानी टिहरी या टेहरी नगर को बनाया, बाद में उनके उत्तराधिकारी प्रताप शाह, कीर्ति शाह और नरेन्‍द्र शाह ने इस राज्‍य की राजधानी क्रमशः प्रताप नगर, कीर्ति नगर और नरेन्‍द्र नगर स्‍थापित की। इन तीनों ने १८१५ से सन्‌ १९४९ तक राज किया। तब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान यहाँ के लोगों ने भी बहुत बढ़चढ़ कर भाग लिया। स्वतन्त्रता के बाद, लोगों के मन में भी राजाओं के शासन से मुक्‍त होने की इच्‍छा बलवती होने लगी। महाराजा के लिये भी अब राज करना कठिन होने लगा था।
और फिर अंत में ६० वें राजा मानवेन्‍द्र शाह ने भारत के साथ एक हो जाना स्वीकर कर लिया। इस प्रकार सन्‌ १९४९ में टिहरी राज्‍य को उत्तर प्रदेश में मिलाकर इसी नाम का एक जिला बना दिया गया। बाद में २४ फ़रवरी १९६० में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी एक तहसील को अलग कर उत्तरकाशी नाम का एक ओर जिला बना दिया।

Thursday, 18 February 2016

तीर्थ क्या हैं ?

जायन्ते च भ्रियन्ते च जलेप्वेव जलौकसः। न च गच्छअन्ति ते स्वर्गमविशुदहमनोमलाः ।।
चित्तमंतर्गतम दुष्टं तीर्थस्नानंच शुध्यति । शतशोअपि जलैधौतम सुराभाण्डमिवाशुची ।।
सार : अगत्स्य ने लोपामुद्रा से कहा – निष्पापे ! मैं मनासतीर्थो का वर्णन करता हूँ, सुनो । इन तीर्थों मैं स्नान करके मनुष्य परम गति को प्राप्त होता है । सत्य, क्षमा, इन्द्रिसंयम, सब प्राणियों के प्रति दया, सरलता, दान, मन का दमन, संतोष, ब्रह्मचर्य, प्रियाभाषण, ज्ञान, धृति और तपस्या – ये प्रत्येक एक एक तीर्थ है । इनमें ब्रहमचर्य परम तीर्थ है । मन की परम विशुद्धि तीर्थों का भी तीर्थ है । जल में डुबकी मारने का नाम ही स्नान नहीं है; जिसने इंद्री संयम रूप स्नान किया है, वही स्नान है और जिसका चित्त शुद्ध हो गया है, वही स्नान है ।
‘जो लोभी है, चुगलखोर हैं, निर्दय हैं, दम्भी हैं और विषयों मैं फंसा है, वह सारे तीर्थों में भली भांति स्नान कर लेने पर भी पापी और मलिन ही है । शरीर का मैल उतारने से ही मनुष्य निर्मल नहीं होता; मन के मैल को पर ही भीतर से सुनिर्मल होता है । जलजंतु जल में ही पैदा होते हैं और जल में ही मरते हैं, परन्तु वे स्वर्ग में नहीं जाते; क्योंकि उनका मन का मैल नहीं धुलता । विषयों में अत्यंत राग ही मन का मैल है और विषयों से वैराग्य को ही निर्मलता कहते हैं । चित्त अंतर की वस्तु है, उसके दूषित रहने पर केवल तीर्थ स्नान से शुद्धि नहीं होती । शराब के भाण्ड को चाहे 100 बार जल से धोया जाये, वह अपवित्र ही रहता है; वैसे ही जब तक मन का भाव शुद्ध नहीं है, तब तक उसके लिए दान, यज्ञ, ताप, शौच, तीर्थसेवन और स्वाध्याय – सभी अतीर्थ है । जिसकी इन्द्रियां संयम मैं हैं, वह मनुष्य जहाँ रहता है, वही उसके लिए कुरुक्षेत्र, नैमिषारण्य और पुष्करादि तीर्थ विध्यमान हैं । ध्यान से विशुद्ध हुए, रागद्वेषरुपी मल का नाश करने वाले ज्ञान जल में जो स्नान करता है, वाही परम गति को प्राप्त होता है ।

Monday, 11 January 2016

Badrinath Yatra | Badrinath Yatra Packages | Badrinath Tour Packages

Badrinath Temple is one of the holiest Hindu temples in India. It is situated in Uttarakhand state along the river Alaknanda, the holy place is fundamentally a Lord Vishnu temple. Badrinath also known as Badri Vishal and Badrinarayan. The major appeal of Badrinath Dham is the one gauge tall bronze of Vishnu in the shape of Lord Badrinarayan which is cast in black "Shaligram" granite. Shri Badrinath temple is flank by two mount ranges recognized as Nar and Narayan with the very tall Neelkanth peak offering a fine background. 
Uttarakhand Chardham presents you a spiritual religious Badrinath Yatra Tour. We pleased to serve you our Badrinath Tour services with well vehicles good accommodation and knowledgeable driver. Every year many people go to Badrinath Dham for Darshan. Temple gates open only for a period of six months, due to intense weather conditions in Himalayas. There are a number of hot water pools here that is Tapt Kund, Narad Kund etc. Uttarakhand Chardham presents you Badrinath yatra from Haridwar to Haridwar with in four days. The opening dates of Badrinath are announced on Vasant Panchami which is on 12 Feb 2016 this year. Badrinath is nearby by road and vehicles go up to the main city. We also organize Badrinath yatra by helicopter. It is a day trip and the Tour will end on the same day by afternoon. Uttarakhand Chardham also arrange you special Aarti at Badrinath Temple So pick you phone and call Uttarakhand Chardham we 24 hour ready to serve you our Badrinath yatra service. We will make your Tour memorable.

Monday, 14 December 2015

Luxury Car Rental for Uttarakhand Chradham Yatra

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